छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में
बारूद और चीखें घुलें एक आवाज़ में
पिस रहे हैं लोग याहवेह खुदा के बीच
और दुआ मांगते हैं शुमाह और नमाज़ में
छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में
हैं सब सियासतें तमाशाई इस कदर
के हल ढूंढ़ती हैं महज़ अलफ़ाज़ में
छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में
हार जीत सरहदें हैं मसला-ऐ-ज़िन्दगी
और जान चल रही है मौत के मिज़ाज में
छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में
शतरंज नहीं है ये इस बिसात में है खून
ऐतबार करें तो प्यादे किस चाल बाज़ में
छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में
मंडरा रहे हैं गिद्द मुर्दों को नोचते हैं
एक और जंग छिड़ेगी चील और बाज़ में
छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में
अब गले से लगा लो एक दुसरे का दीन
और कुछ नहीं रक्खा है इस अमन के राज़ में
छिड़ी हुई है जंग कहीं दूर दराज़ में
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