Monday, December 8, 2025

हकीकत नहीं haqeeqat nahin

बस मिलती है ज़िल्लत, अक़ीदत नहीं

भयानक बला है, गनीमत नहीं 

पर आशिक़ से पूछो तो बोलेगा वो 

मुहब्बत है जन्नत, मुसीबत नहीं


तू आशिक़ नहीं तो तू समझेगा क्या 

इस मजमे में तेरी शरीकत नहीं 


बेमानी है जीना मुहब्बत बिना 

ऐ दोस्त, ये मेरी नसीहत नहीं 


हुस्न वालों को उसने बनाया है खूब

सूरत तो दी है पर सीरत नहीं 


है हुनर, मैं परखता हूँ हीरों को 

दुनिया में आशिक़ की कीमत नहीं 


मशहूर कसीदे मोहब्बत के हैं 

हैं किस्से कहानी -- हकीकत नहीं 

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