ये ज़माना क्या जाने की
आतिशबाज़ी क्या होती है
पंद्रह साल पुरानी होकर
उल्फत ताज़ी क्या होती है
अल्हड़पन की ख्वाहिश को
पकी उम्र में पाया जो
तब जाना के दिल हरवाके
जीती बाज़ी क्या होती है
इतने बरसों की दूरी से
हालातों की मजबूरी से
लगा निशाना तो जाना के
तीरंदाज़ी क्या होती है
जश्न-ऐ-मुशाबरत मनाके
जिस्मों की वो प्यास मिटाके
पहली बार एहसास किया के
खुश-मिजाज़ी क्या होती है
अर्सों पहले शेर सुनाके
जवां हुस्न का दिल फुसलाके
हमराज़ों को जता दिया के
दूर-अंदाज़ी क्या होती है
आशिक़ हूँ मैं ये माना है
इश्क़ तेरा एक पैमाना है
इसको पा के पता लगा
के इश्कबाज़ी क्या होती है!
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