Saturday, June 12, 2021

शांत ज्वालामुखी

 न बादल घिरते हैं  

न झूमते दरख़्त

न बिजली के चौंधे

से थमता है वक़्त

अंदर तो आंधी है 

मन में ही बाँधी है  

सुकून-ए-सूरत है  

उबलता है रक्त 


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