Friday, September 11, 2020

हमारी मुलाकातें

हमारी मुलाकातें होतीं हैं
शायद तुझे अहसास नहीं

ख़यालों में तुझे बुलाता हूँ
तेरी ज़ुल्फ़ों को सहलाता हूँ
दिन कैसे गुज़रा 
ये बताता हूँ
रोज़मर्रा की बातें हैं
ऐसी तो कोई ख़ास नहीं
हमारी मुलाकातें होतीं हैं
शायद तुझे अहसास नहीं

तेरे सपनों को सुनता हूँ
अपने भी थोड़े बुनता हूँ
यादों में जो चमक रहे
मैं उन लम्हों को चुनता हूँ
दूर से उनको देख के खुश हूँ
क्यूंकि अब वो मेरे पास नहीं
हमारी मुलाकातें होती हैं
शायद तुम्हें एहसास नहीं

कुछ खालीपन तो लगता है
एक मीठा दर्द सुलगता है
आशिकानापन 
तनहा शामों का ठगता है
कहने को तो सब ठीक है
कोई गम नहीं, मैं उदास नहीं
हमारी मुलाकातें होती है
शायद तुझे अहसास नहीं

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