Saturday, July 15, 2017

मुस्कान

तेरी याद को मेहमान समझा
धड़कनों को नादान समझा
क़त्ल कर गयी मुस्कान तेरी
जिसको महज़ मुस्कान समझा

कर लिया बिन सोचे समझे
जो  इश्क़ को आसान समझा 

चुरा गया खुशबू वो सारी
जिसेको  बागबान समझा 

घुटी दर्द की चीखें थीं वो 
जिन्हें अम्न का ऐलान समझा 

वो पिंजरा हालातों का था 
जिसे हमने मकान समझा 

आतिशबाज़ी गैरों की थीं 
हमने अपना आसमान समझा 

क्या क्या सितम सेह गए हम
तेरे इश्क़ का अंजाम समझा

Thursday, May 18, 2017

शहनाई

तेरे लव्ज़ों और ज़ुल्फ़ों में फर्क समझा दे
दोनों में शायरी बस्ती है शायद 
अल्फ़ाज़ों में उमंगें उलझें कुछ ऐसे
बालों में हवाओं की मस्ती है शायद 

तेरे लव्ज़ों और आँखों में फर्क समझा दे
दोनों में बहुत गहराई है शायद
अलफ़ाज़ कुरेदें कुछ छिपे हुए सच
आँखों में डूबी सच्चाई है शायद

तेरे लव्ज़ों और होठों में फर्क समझा दे
दोनों में रूह मुस्कुराती है शायद
अलफ़ाज़ जज़्बातों के कई राज़ खोलें
तबस्सुम कई राज़ छुपाती है शायद

तेरे लव्ज़ों और अदा में फर्क समझा दे
दोनों में कमाल की अंगड़ाई है शायद
अल्फ़ाज़ों के फेर मैं जादू है इतना
अंदाज़ की तेरे परछाई है शायद

तेरे लव्ज़ों और वजूद में फर्क समझा दे
एक दूजे को दोनों सजाते हैं शायद
अलफ़ाज़ शख्सियत का नौशा है और 
हम जैसे ?
हम जैसे शहनाई बजाते हैं शायद 

मेरे लव्ज़ों और हसरत में फर्क समझा दे
दोनों में कुछ बुत-परस्ती है शायद
इस उम्र में अंदाज़-ए-बयां है गर ऐसा
दोनों पे छुप कर तू हंसती है शायद 


Saturday, April 15, 2017

इंतज़ार

छिपकर देखा है मैंने  
तेरा अंदाज़-ए-इंतज़ार 
डूबते सूरज से चौंधियाई आँखें
राहों को बेरुखी से कुरेदती हैं
माथे पे फ़िक्र की शिकन भी है
होठों पे उमंगों की तबस्सुम भी
पूरा जिस्म तैनात है उस झलक के लिए
जिस झलक से पिघल जाएगा तनाव सारा
इंतज़ार मेरा नहीं, किसी और का है
इस रंजिश में गुज़ार देंगे ज़िन्दगी हम भी 

कनखियाँ

ये कनखियों के इशारे हैं क्या?
ये मुस्कानों के लश्कारे हैं क्या?
तू दूर से ही कर देगी घायल हमें 
हम इतने किस्मत के मारे हैं क्या?

Monday, March 13, 2017

होली मुबारक समृद्धि



भोली है निकली है घर से
होली है दुबकी नहीं डर से
दरिंदा है छेड़ेगा खामखां में
परिंदा है वो दिल आसमाँ में
डरेगी नहीं वो गलत ताकतों से
मरेगी नहीं उसकी चाह आफतों से
ख़ौफ़ज़दा हूँ खतरों का ज़िक्र तो करूंगा
एक पिता हूँ हर लम्हा फ़िक्र तो करूंगा
टोकूंगा नहीं सबक़ है इस किस्से में
रोकूंगा नहीं रंग सभी हैँ तेरे हिस्से में

Wednesday, March 8, 2017

एक दिन की खैरात: Women's Day

बराबरी की जंग तू लड़ना मत
इस मायाजाल में तू पड़ना मत
तेरा वजूद आज़ाद है
कुछ भी कर गुजरने को
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

तेरा दिन किसी का ग़ुलाम नहीं
तेरी ख्वाहिशें बिलकुल आम नहीं
तय कर तू क्या होगी पहचान तेरी
खुद ज़नाना अंदाज़ों को जकड़ना मत
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

एक दिन की खैरात मत करना क़ुबूल
तेरी बुलंदी का रहे  बस एक उसूल
हर दिन है तेरा, हर रात भी तेरी
इस हक़ के आग़ाज़ से बिछड़ना मत
मर्दानी शख्सियत में सिकुड़ना मत

Thursday, February 23, 2017

सुहाग रात


एक तबस्सुम का सुराग था
तेरे हुस्न का चिराग था
लिबाजों की लाली में छुपा
कितना हसीं राग था

अदाओं के ख़ज़ाने से
आँखों के मैखाने से
सुरूर का धुंआ उठा
होठों के सुलग जाने से

करिश्मा लाल रंग का था
या तेरी जवां उमंग का था
नाच उठी वो लालिमा
वो जश्न हमारे संग का था