shayadshayar
Friday, November 18, 2016
तेरी पहचान
घुटन खुले आसमान में क्यों है?
धूल की चिलमन रोशनदान में क्यों है?
सब कुछ है मेरी बाहों में लेकिन
मेरी यादों में वो तेरी पहचान क्यों है?
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment