ये होठों की रंगत
कुछ ज़्यादा ही है
ये मस्ती की संगत
कुछ ज़्यादा ही है
मोना लीसा की भाँती
ये हलकी तबस्सुम
हलकी है भी मगर
कुछ ज़्यादा ही है
चेहरे को छू कर
वो ज़ुल्फ़ों का गिरना
चश्मे से चेहरे का
कुछ और निखरना
इस धड़कन से पूछो
कुछ ज़्यादा ही है
No comments:
Post a Comment