सारे चिराग बुझाने के बाद
साफ़ नज़र आता है तेरा साया मुझे
उम्मीदें उजालों की मोहताज नहीं होतीं
यह राज़ अब समझ आया है मुझे
न तारों की चमक, न मशालों की आग
तेरी चाहत ने सफर कराया है मुझे
छोड़ जाता ये महफ़िल गर तू शरीक न होती
तेरी रौनक ने चुपचाप मनाया है मुझे
साफ़ नज़र आता है तेरा साया मुझे
उम्मीदें उजालों की मोहताज नहीं होतीं
यह राज़ अब समझ आया है मुझे
न तारों की चमक, न मशालों की आग
तेरी चाहत ने सफर कराया है मुझे
छोड़ जाता ये महफ़िल गर तू शरीक न होती
तेरी रौनक ने चुपचाप मनाया है मुझे
No comments:
Post a Comment