Friday, September 11, 2020

इबादत की इजाज़त

इबादत की इजाज़त तू मुझे दे दे

तेरे जलवों की हसरत तू मुझे दे दे 

फिरता हूँ बेमकसद गलियों में तेरी

आशिक़ाना ये मकसद तू मुझे दे दे 


तू नज़दीक है, इस बात का मैं खैर करूँ 

और आशिक़ भी हैं, उन सब से मैं बैर करूँ  

लम्हा ही सही, दूर से कर लूँगा दीदार 

लम्हे में भरी मुद्दत तू मुझे दे दे 


पिरोए हैं ज़ुल्फ़ों में तेरे ख्वाब कई 

डुबो दिए तेरे नूर में आफताब कई  

वफ़ाएं और भी हैं निभाने के लिए

बेवफाई की तोहमत तू मुझे दे दे 


कहे तू के मैं खुद की हदों में रहूँ

बेसुद्ध या बेहाल मयकदों में रहूँ 

हो नशा तेरा, किसी शराब का न हो 

इसी सुरूर की ग़फ़लत तू मुझे दे दे 


यूँ तो चाहत की कीमत बहुत सस्ती है

तेरी आँखों की चमक ही में ये बस्ती है

तू इधर देख, चकाचौंध नज़ारा होगा

उस नज़र से मुहब्बत तू मुझे दे दे     


इबादत की इजाज़त तू मुझे दे दे

तेरे जलवों की हसरत तू मुझे दे दे 

फिरता हूँ बेमकसद गलियों में तेरी

आशिक़ाना ये मकसद तू मुझे दे दे 


Saturday, September 5, 2020

लहरों का बैर

  

लहरों का बैर कश्ती से नहीं

उलझती वो अपने ही पानी से हैं


माझी उन लहरों से जूझेगा ज़रूर 

पर रिश्ता तो उसका रवानी से है


हवाएं भी रुख बदलती रहेंगी

सरोकार अपनी तर्जुमानी से है 


साहिल कई हैं, ठिकाना कहाँ है?

फैसला ये मेरी मनमानी से है


मौसम बदलेंगे और बारिश भी होगी

ये तमाम रंग मेरी कहानी से हैं 


जल परियां भी होंगी सफर में कई 

मेरा इश्क़ तो बस एक दीवानी से है


लहरों का बैर कश्ती से नहीं

उलझती वो अपने ही पानी से हैं 


Tuesday, August 18, 2020

नई शुरुआतें

देर सवेर मुलाक़ात तो होगी

तकल्लुफ सही, पर बात तो होगी

मोहल्ला वही, ये रिश्ते वही

फिर से सही, शुरुआत तो होगी


Saturday, August 15, 2020

तजुर्बों के तोहफे

 तजुर्बों के ये तोहफे 

पेश हुए हर साल 

जद्दोजहद की शिकन

तो कभी सफ़ेद बाल


रिश्तों की फुलझड़ियाँ 

हसीं लम्हों की कड़ियाँ 

फ़तेह मुसीबतों की 

शिकस्त मुहब्बत्तों की  

जश्न कामियाबी का

नाकामी पे मलाल

तजुर्बों के ये तोहफे 

पेश हुए हर साल 


 

यारों संग अय्याशियां 

ज़माने की बदमाशियां 

अहसासों में मनमुटाव

जिस्म की चोटें, दिल पे घाव

ग़मों की खामोश चुभन 

उल्फतों का उबाल

तजुर्बों के ये तोहफे 

पेश हुए हर साल


हैसियतों की लिए जंग 

आवारगी का अपना रंग

गलत सही के चौराहे

अहम् फैसले मनचाहे 

ज़िन्दगी की शतरंज में

जोखिम भरी वो चाल

तजुर्बों के ये तोहफे 

पेश हुए हर साल


Wednesday, July 22, 2020

इंतेखाब

बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे 
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर 

पेचीदा हैं ये रिश्तों के रस्म-ओ-रिवाज़ 
निभाओ तो ज़ंजीर है, निबटाओ तो डोर 

इंतज़ार की रातों का अंत होगा ज़रूर 
शुबहा से टूटें ख्वाब, उम्मीद रहे तो भोर 

इज़हार-ए-मुहब्बत करें भी तो कैसे 
कह दें तो जोरा जोरी, न कहें ...कमज़ोर 

बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे 
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर 
    

Tuesday, June 9, 2020

ग़ज़ब


रातों के अंधेरों का 
कुछ तो सबब ज़रूर होगा

ग़मगीन इस माहौल में
कहीं रब ज़रूर होगा

तू नहीं तुझ पर शायरी 
में मसरूफ हो रहे हैं

इस तंहाई के सेहर में
कुछ ग़ज़ब ज़रूर होगा

Saturday, May 30, 2020

चिलमनों से बदलते रिश्ते

हुआ करता था मेरा चिलमनों से बैर 
तेरे जलवों पे उनका पहरा जो था 

अब दौर-ए-कोरोना है
एहतियातों की बारिश है
दूर से ही मिलना है
ये चिलमनों की साज़िश है

कर ली दोस्ती उन पर्दों से 
उन पर्दों पे तेरा चेहरा जो था