Friday, September 11, 2020
अनजानों का मजमा
हमारी मुलाकातें
शायद तुझे अहसास नहीं
ख़यालों में तुझे बुलाता हूँ
तेरी ज़ुल्फ़ों को सहलाता हूँ
दिन कैसे गुज़रा
ये बताता हूँ
रोज़मर्रा की बातें हैं
ऐसी तो कोई ख़ास नहीं
हमारी मुलाकातें होतीं हैं
शायद तुझे अहसास नहीं
तेरे सपनों को सुनता हूँ
अपने भी थोड़े बुनता हूँ
यादों में जो चमक रहे
मैं उन लम्हों को चुनता हूँ
दूर से उनको देख के खुश हूँ
क्यूंकि अब वो मेरे पास नहीं
हमारी मुलाकातें होती हैं
शायद तुम्हें एहसास नहीं
कुछ खालीपन तो लगता है
एक मीठा दर्द सुलगता है
आशिकानापन
तनहा शामों का ठगता है
कहने को तो सब ठीक है
कोई गम नहीं, मैं उदास नहीं
हमारी मुलाकातें होती है
शायद तुझे अहसास नहीं
इबादत की इजाज़त
इबादत की इजाज़त तू मुझे दे दे
तेरे जलवों की हसरत तू मुझे दे दे
फिरता हूँ बेमकसद गलियों में तेरी
आशिक़ाना ये मकसद तू मुझे दे दे
तू नज़दीक है, इस बात का मैं खैर करूँ
और आशिक़ भी हैं, उन सब से मैं बैर करूँ
लम्हा ही सही, दूर से कर लूँगा दीदार
लम्हे में भरी मुद्दत तू मुझे दे दे
पिरोए हैं ज़ुल्फ़ों में तेरे ख्वाब कई
डुबो दिए तेरे नूर में आफताब कई
वफ़ाएं और भी हैं निभाने के लिए
बेवफाई की तोहमत तू मुझे दे दे
कहे तू के मैं खुद की हदों में रहूँ
बेसुद्ध या बेहाल मयकदों में रहूँ
हो नशा तेरा, किसी शराब का न हो
इसी सुरूर की ग़फ़लत तू मुझे दे दे
यूँ तो चाहत की कीमत बहुत सस्ती है
तेरी आँखों की चमक ही में ये बस्ती है
तू इधर देख, चकाचौंध नज़ारा होगा
उस नज़र से मुहब्बत तू मुझे दे दे
इबादत की इजाज़त तू मुझे दे दे
तेरे जलवों की हसरत तू मुझे दे दे
फिरता हूँ बेमकसद गलियों में तेरी
आशिक़ाना ये मकसद तू मुझे दे दे
Saturday, September 5, 2020
लहरों का बैर
लहरों का बैर कश्ती से नहीं
उलझती वो अपने ही पानी से हैं
माझी उन लहरों से जूझेगा ज़रूर
पर रिश्ता तो उसका रवानी से है
हवाएं भी रुख बदलती रहेंगी
सरोकार अपनी तर्जुमानी से है
साहिल कई हैं, ठिकाना कहाँ है?
फैसला ये मेरी मनमानी से है
मौसम बदलेंगे और बारिश भी होगी
ये तमाम रंग मेरी कहानी से हैं
जल परियां भी होंगी सफर में कई
मेरा इश्क़ तो बस एक दीवानी से है
लहरों का बैर कश्ती से नहीं
उलझती वो अपने ही पानी से हैं
Tuesday, August 18, 2020
नई शुरुआतें
देर सवेर मुलाक़ात तो होगी
तकल्लुफ सही, पर बात तो होगी
मोहल्ला वही, ये रिश्ते वही
फिर से सही, शुरुआत तो होगी
Saturday, August 15, 2020
तजुर्बों के तोहफे
तजुर्बों के ये तोहफे
पेश हुए हर साल
जद्दोजहद की शिकन
तो कभी सफ़ेद बाल
रिश्तों की फुलझड़ियाँ
हसीं लम्हों की कड़ियाँ
फ़तेह मुसीबतों की
शिकस्त मुहब्बत्तों की
जश्न कामियाबी का
नाकामी पे मलाल
तजुर्बों के ये तोहफे
पेश हुए हर साल
यारों संग अय्याशियां
ज़माने की बदमाशियां
अहसासों में मनमुटाव
जिस्म की चोटें, दिल पे घाव
ग़मों की खामोश चुभन
उल्फतों का उबाल
तजुर्बों के ये तोहफे
पेश हुए हर साल
हैसियतों की लिए जंग
आवारगी का अपना रंग
गलत सही के चौराहे
अहम् फैसले मनचाहे
ज़िन्दगी की शतरंज में
जोखिम भरी वो चाल
तजुर्बों के ये तोहफे
पेश हुए हर साल
Wednesday, July 22, 2020
इंतेखाब
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर
पेचीदा हैं ये रिश्तों के रस्म-ओ-रिवाज़
निभाओ तो ज़ंजीर है, निबटाओ तो डोर
इंतज़ार की रातों का अंत होगा ज़रूर
शुबहा से टूटें ख्वाब, उम्मीद रहे तो भोर
इज़हार-ए-मुहब्बत करें भी तो कैसे
कह दें तो जोरा जोरी, न कहें ...कमज़ोर
बहुत कुछ कह जाती है ज़िन्दगी हमसे
सुनो तो शायरी है, न सुनो तो शोर