Friday, May 3, 2024

ख़ुशी khushi

 गिन्नियों की खनक में

महफिलों की चमक में

कामयाबी की हदों में 

झिलमिल शोहरतों में 

ढूंढी बहुत पर नहीं मिली 

तुतलाती ज़ुबानों में 

तकिये  सिरहानों में 

दादी के मर्तबानों में 

मिलने के बहानों में

यारों के ठिकानों में 

दिल-फैंक अफसानों में

ख़ुशी बिखरी पड़ी मिली 


Saturday, April 20, 2024

रफ़्तार कारवां की raftaar kaarvaan ki

 रफ़्तार कारवां की

अब कम हो चली है

जद्दोजहद सब  

हज़म हो चली है

देते थे सराब

मकसद-ऐ-ज़िन्दगी

अब ज़िन्दगी खुद 

वहम हो चली है

लुत्फ़ आशिकी के

माशूक संग मनाये

ये माशूक किसीकी 

बेगम हो चली है

इत्र की मिलावट

साँसों में याद उनकी 

कम्बख्त याद अब वो

मरहम हो चली है

देखते थे सपने

दोनों जिस नज़र से

उम्र संग नज़र भी

कुछ नम हो चली है

संजीव क्या लिख्खे 

मसले सब तरफ हैं 

ये कायनात मेरी

कलम हो चली है 


Sunday, March 31, 2024

मौसम mausam

 ये मौसम को बदलने दो

पहाड़ों को पिघलने दो

उबल जाएँगी सब नदियाँ 

वो नदियों को मचलने दो


हवाओं में जो खुशबू है

उसे तुम कैद मत करना 

यही आवाज़ गुलों की है

फ़िज़ा में इसको घुलने दो

 

जो भीगे हैं ये बारिश में

बिना छातों के निकले थे 

गली में उनकी फिसलन थी 

उस फिसलन में फिसलने दो 


अब गरम दौर भी आएगा

चलेगा कायदा लूह का 

अब इज़्ज़त दो कानूनों को

लापरवाहों को जलने दो 


ये मौसम को बदलने दो

पहाड़ों को पिघलने दो

उबल जाएँगी सब नदियाँ 

वो नदियों को मचलने दो


Saturday, January 20, 2024

हमसफ़र hamsafar

 मेरी ज़िन्दगी में तू

मेरा हमसफ़र नहीं

के मैं किस तरफ चला

ये तुझे खबर नहीं

मेरे काफिले में हैं

वो अज़ीज़ बेशुमार

जो हैं तो आस पास 

पर उस कदर नहीं


कयामतों के झोंके

बरज़ोर मुझपे बरसे

तेरी याद को भुला दें 

उनमें असर नहीं


राहों में कितनी भटका

और चौखटों को ताका 

तेरे आंगनों की ज़िद्द थी 

यूं दर-ब-दर  नहीं 


बेताबी बस ये रहती 

हर सुबह तुझको देखूं

किस्मत में मेरी पर ये

हसीं सहर नहीं 

 

ज़माने ने दाद भी दी

बहुतों ने मुझको चाहा

जो तक रहीं हैं उनमें

तेरी नज़र नहीं


तू मुनसियत  है मेरी

तेरी आशिकी की लत है

दुनिया में आशिकी से 

बढ़कर ज़हर नहीं

Tuesday, October 3, 2023

वक़्त से बातचीत waqt se baatcheet


ये पूछता है मुझसे

अब वक़्त का तक़ाज़ा 

यहां तक तू पहुंचा 

अगला मुकाम क्या है


            ऐ वक़्त तू है ज़ालिम

            है  इस तरह नवाज़ा

            ऐंठे हैं दाम अब तक

            तो अगला दाम क्या है?


काम मेरा मैं खोलूं 

फिर नया दरवाज़ा 

तू बढ़ के खोल उसको

तेरा और काम क्या है?


            उम्मीद है ये बासी

            तू पेश कर कुछ ताज़ा

            ये ज़िन्द्दगी है बाकी

            तेरा इंतज़ाम क्या है?


वो इंतज़ाम मेरा

तो है एक जनाज़ा 

तेरी जंग तय करेगी

तेरा अंजाम क्या है 


            रिश्तों की दास्तान है    

            ज़िन्दगी लिहाज़ा

            रिश्तों में ढूंढ़ता हूँ 

            मेरा अहतराम क्या है 


Monday, September 18, 2023

जस्बातों में किफायत jazbaaton mein kifaayat

 

जज़्बातों में इतनी

किफायत न करो

हया की तुम इतनी 

वकालत न करो

दबा रक्खा बरसों 

जो दिल में अरमान

उस अरमान की इतनी

ज़लालत न करो


इशारों में तुमने

सराहा है मुझे

इशारों में इतनी

नज़ाकत न करो


बहुत हिम्मत करके

थामा है तेरा हाथ 

इस हिम्मत की इतनी

शिकायत न करो 


देखी है खुदाई

जलवों में तेरे 

तेरी ज़िद्द है इतनी

इबादत न करो


अदा तेरी ऐसी

के मन मचल जाये

फरमान तेरा इतनी 

शरारत न करो


गैरों से मिलती हो

तो आग लगे दिल में

गुज़ारिश है इतनी

हरारत न करो


ज़िन्दगी गुज़ारी

आशिकी में तेरी 

तू कहती है इतनी

मुहब्बत न करो


Saturday, July 29, 2023

बारिश baarish

टप टप करके 

गपशप करके 

इन बूँदें ने बारिश की 

खिलखिलाकर

छपछपाकर

नटखटियों से साज़िश की 

गढ़ गढ़ करके  

बड़ बड़ करके 

गर्जन काली बदरी की

शोर मचाकर 

तैश दिखाकर 

स्वांग रचें बेकद्री की

खूब कड़क के

तेज़ भड़क के

तांडव जो है बिजली का

चकाचौंध कर

गगन फांद कर 

नर्तन है मन मचली का

चेह चाहाके

पर झटकाके 

पनाह ली परिंदों ने 

डाल डाल पे 

पात पात पे

जश्न करा बाशिंदों ने 

गदगद होकर

सुधबुध खोकर 

खिड़की से मैं झाँक रहा

भीगे दर्पण 

में मैं बचपन

के वो नज़ारे ताक रहा

बौछारों की

ललकारों की

आ गया मैं बातों में

बाहर आकर 

झिझक हटाकर

भीगा मैं बरसातों मैं

बच्चे बनकर

ऐसे धुलकर

हम यादों में खूब गए  

कुछ दूरी में

मजबूरी में

कितनों के सपने डूब गए