Sunday, October 30, 2016

बिखरी यादें

बिखरे पड़े थे
यह दमकते ख़याल
तेरी याद में जिन्हें
चमकाया था मैंने
चुभते थे पैरों में
आँखों में लगते थे
कुछ टुकड़ों को
साँसों में पाया था मैंने
झिलमिल सुलगते थे
आईने से लगते थे
उनमें देखा तो खुद को
ही पाया था मैंने
समेटा जो उनको
के सफा कर दूँ मन से
बहुत इस पर दिल को
रुलाया था मैंने
बिखरे पड़े हैं
यह दमकते ख़याल
तेरी याद में जिन्हें
चमकाया था मैंने
चुभते हैं चुभने दो
लगते हैं लगने दो
इन्ही यादों में जीवन
गवाया है मैंने

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