Sunday, October 30, 2016

गुज़र गया दिन

गुज़र गया दिन या गुज़ारा मैंने
पूछ लिया सवाल ये दोबारा मैंने
ख़्वाबों के शहर में घूमा था मैं आज
देखा एक नया नज़ारा मैंने
गुज़र गया दिन या गुज़ारा मैंने
पन्ने पल्टाए थे अनपढ़ी किताबों के
लव्ज़ों के खेल को निहारा मैंने
दफ़्न यादों को कुरेद के निकाला है
कंकालों की शक्ल को सवारा मैंने
गुज़र गया दिन या गुज़ारा मैंने
ज़िन्दगी की दौड़ में थम जाना जुर्म है
रुकने का कर दिया इशारा मैंने
गुज़र गया दिन या गुज़ारा मैंने
फुरसत मिली थी बहुत अरसे के बाद
कर दिया वक़्त को आवारा मैंने
गुज़र गया दिन या गुज़ारा मैंने

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