आतिशबाज़ी सिर्फ दिल की धड़कन में हो
आसमां में तो मैंने सपने सजाये हैं
रोशिनी गम के तहखानों तक जाये
झरोखों में ऐसे दीपक जलाये हैं
हर शख्स नए लिबाज़ पहन के इतराये
ज़हन से पुराने शिकवे झड़वाए हैं
शक्कर की तानाशाही मिठास पे क्यूँ हो
घोल मेरे जज़्बात ये शेर जो बनाये हैं
आतिशबाज़ी सिर्फ दिल की धड़कन में हो
आसमां में तो मैंने सपने सजाये हैं
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