कुरेदना है तुझे ऊंचाइयों को
शिकस्त करना है खाइयों को
शिखरों से याराना करना है तुझे
बादलों संग दम भरना है तुझे
हक़ से मांगेगी तू आसमां का ताज
पर हिदायत ये मेरी तुझको है आज
खुद की हकीकत से जुड़ना तो सीख
उड़ने से पहले तू उड़ना तो सीख
तू सूरत न देखे मंदियों की
खुश-हाल हो राहें बुलंदियों की
तेरे अंदाज़ में कुछ कमी न हो
कमी हो तो आँखों में नमी न हो
हकीकत की हदों से लड़ लेगी तू
हर कमी के आगे बढ़ लेगी तू
तंगियों में पर सिकुड़ना तो सीख
उड़ने से पहले तू उड़ना तो सीख
इरादों को अपने इशारा तो दे
जज़्बे को अपने एक नारा तो दे
हौसले को अपने दे एक चेहरा
मंज़िल पे परचम तू अपना लहरा
बदलेंगी राहें जब बदलें हालात
बदलना है तुझे भी इन सब के साथ
हालातों के साथ तू मुड़ना तो सीख
उड़ने से पहले तू उड़ना तो सीख
No comments:
Post a Comment