Sunday, October 30, 2016

एक हिदायत अपनी बेटी के नाम

कुरेदना है तुझे ऊंचाइयों को 
शिकस्त करना है खाइयों को 
शिखरों से याराना करना है तुझे 
बादलों संग दम भरना है तुझे 
हक़ से मांगेगी तू  आसमां का ताज 
पर हिदायत ये मेरी तुझको है आज 
खुद की हकीकत से जुड़ना तो सीख
उड़ने से पहले तू उड़ना तो सीख  

तू सूरत न देखे मंदियों की
खुश-हाल हो राहें बुलंदियों की
तेरे अंदाज़ में कुछ कमी न हो
कमी हो तो आँखों में नमी न हो
हकीकत की हदों से लड़ लेगी तू
हर कमी के आगे बढ़ लेगी तू
तंगियों में पर सिकुड़ना तो सीख
उड़ने से पहले तू उड़ना तो सीख

इरादों को अपने इशारा तो दे 
जज़्बे को अपने एक नारा तो दे 
हौसले को अपने दे एक चेहरा 
मंज़िल पे परचम तू अपना लहरा
बदलेंगी राहें जब बदलें हालात 
बदलना है तुझे भी इन सब के साथ
हालातों के साथ तू मुड़ना तो सीख
उड़ने से पहले तू उड़ना तो सीख  

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